शिक्षक हमेशा शिक्षक रहेता है। पाठशाला उसके लिए किसी मंदिर गुरुद्वारा चर्च या मस्जिद से कम नहीं होता । आज मैं आपसे गुजरातके बाहरकी एक पाठशालासे भेंट करानेकी कोशिश कर रहा हूँ । मूँजें आशा और विश्वास है की मज़ा आयेगा ।
हम यु तो घूमने निकले है मेरे साथी चंदूभाई प्रजापति और विक्रमसिंह झाला के साथ मेरी बेटी वैश्विका और भतीजे श्रेयांशको लेकर। लेकिन मैंने कहा ऐसे ७-८ दिनसे हम अपनी पाठशालासे दूर हैं। रास्तेमें जाते जाते गुजरात से १२०० किलोमीटर दूर पंजाबके मोग़ा ज़िल्लेमें एक गाँव है बंबिहाँ। वहाँसे गुज़ारते रस्तेमे पाठशाला देखी। हम हमारी शिक्षाके लिए उस पाठशालामें गए।
मित्रों सबसे ज़्यादा देखनेवाली बात है की पाठशाला ६ से १० तक कक्षा में कार्यरत है। १२ शिक्षक है। १५६ छात्र अभ्यास करते है। पाठशालामें पेड़ों और बाग़में जितने फूल खिले है वैसे ही हर बच्चे को सजाया है ऐसा लगा। छत्रोंने अध्यापकोकी मदद से अपने क्लासमें नए नए अभ्यासके साधन निर्मित किए है। हर क्लास में ऐसे चार्ट्स बने हुए है। थोड़ा संवाद मैंने छत्रोंके साथ किया, पढ़ाईके बारेमें वार्तालाप भी किया। छात्र उत्तर जानते है। मेरे साथ उनकी बात बहुत प्रेरणा देने वाली रही।
मेरे साथी विक्रमसिंह ने सारे बच्चोंके साथ योग प्राणायाम व्यायाम करवाए। गुजरातके शिक्षणमें और हमारी पाठशालामें करवाते है वैसे हल्के कसरतों का परिचय करवाते हुए शरीरको स्वस्थ रहेनेके लिए नए विचार दिए। साथ में हल्के योग करवाए। छत्रोंके साथ फ़िट रहेनेके लिए संवाद किया।
चंदूभाई ने छत्रोंसे वार्तालाप किया और हमारी पाठशालाके बारेमें जानकारी दी। गणितके कुछ नियमोकी जानकारी दी।
पाठशालाके बारेमें जो मैंने देखा और अनुभव किया वो मैं आपके सामने रखवनेकी कोशिश कर रहा हु।
पाठशालाकी स्थापना १९२४ में हुई है। आज़ादीका दौर देखा है।
पाठशालामें प्रवेश करते ही सबसे पहेले नज़र आयी सफ़ाई।
पाठशालाका हर एक कौना स्वच्छ दिखाई देता है।
पेड़ लगाए गए है।
सुंदर बाग़ बनाया गया है।
खेलनेके लिए मैदान है।
हर क्लास हवा उजाससे भरा नज़र आया।
पुस्तकालय बहुत ही बढ़ियाँ तरीक़ेसे निर्माण किया गया है, १५०० से ज़्यादा पुस्तक छत्रोंके ज्ञानमें दिन-प्रतिदिन वृद्धि कर रहे है।
२० से ज़्यादा कम्प्यूटर वाली एक लैब अध्यापकों ने लोकसहयसे निर्माण की है।
छत्रोंको स्वरक्षाकी तालीम देनेका काम कर रहे है।
पीनेके लिए शुद्ध पानी उपलब्ध कराया जा रहा है।
Senitation स्वच्छ है।
Mid Day Meal की व्यवस्था बहुत सुंदर तरीक़ेसे हो रही है।
प्रार्थनाके लिए स्टेज बना हुआ है।
नियमित प्रार्थनामें नयी जानकारी उपलब्ध करायी जाती है।
सारे छात्र अनुशासन की प्रेरणा देते है।
सारे अध्यापक उत्साहसे भरे है। छात्र उनसे अच्छी शिक्षा प्राप्त कर रहे है। निश्चित उनके जीवनको बनानेके लिए ये प्रेरक रहेगा।
छात्र को नियमित टास्क दिए जाते है। और वो ख़ुद अपना कार्य करते हुए नज़र आए।
स्वागत सत्कार भी प्रेरणा दे वैसा रहा।
सच मुझे ऐसा आज अनुभव हुआकी शिक्षक समाजका निर्माण करता है। एक सुंदर पाठशालाका निर्माण आसान नहीं होता। बहुत सारे सवालों और कार्योंके साथ वो अपनी duty निभाते है। यहाँ भी extra काम शिक्षक करते हुए नज़र आए। मैं आज विश्वाससे कह सकता हु की देशका भावी सरकाली पाठशालामें हो रहा है। भले कोई माने या ना माने लेकिन देखनेवाले ज़रूर बोलेंगेकी शिक्षक राष्ट्र निर्माण कर रहे है।
मैं बंबिहा पाठशालाके शिक्षकोंका आभारी हु। हम घूमने निकले थे। कई मंदिरोमें दर्शन किए और अपने वतन आते हुए शिक्षाके मंदिरमें जाके सफ़रको समाप्तिकी और ले जाते हुए गर्व और संतोषका अनुभव हो रहा है। एक सप्ताह बाद बच्चोंसे मिलकर प्रसन्नता हो रही है।
मेरी पाठशालाके शिक्षक सदैव नया कार्य करते रहते है। हम तीन शिक्षक पाठशालासे दूर है फिर भी बहुत अच्छा संचालन हो रहा है। मैं आभारी हु बंबिहा पाठशालाके शिक्षकोंका की उन्होंने हमें उनकी पाठशाला देखनेका अवसर दिया। जीवनभर ये याद रहेगा।
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Great job..keep it up...
ReplyDeleteઆપના શબ્દો અમારી ઊર્જામાં વધારો કરશે... આભાર
DeleteNice
ReplyDeleteખુબ ખુબ આભાર... સતત અમારા ઉત્સાહમાં વધારો કરવા બદલ
DeleteNice
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